कटान की भेंट चढ़ता शिवाल–गोपालनगर, तीन परियोजनाएं निरस्त, 30 हजार आबादी पर संकट
सरयू नदी के दाएं तट पर पक्का ठोकर न बनने से गांवों का अस्तित्व खतरे में, ग्रामीणों ने दी सड़क पर उतरने की चेतावनी

रिपोर्ट- बसंत कुमार सिन्हा

बलिया। जनपद बलिया के विकास खंड बैरिया अंतर्गत सरयू नदी के किनारे बसे ग्राम पंचायत शिवाल और गोपालनगर टाड़ी कटान की विभीषिका से जूझ रहे हैं, लेकिन बाढ़ विभाग की उदासीनता के चलते हालात लगातार भयावह होते जा रहे हैं। विगत वर्ष नदी के भीषण कटान में रिहायशी मकान और सैकड़ों बीघा कृषि योग्य भूमि सरयू नदी में समा चुकी है।
कटान रोकने के लिए बाढ़ विभाग द्वारा तीन अलग-अलग बाढ़ सुरक्षात्मक परियोजनाएं तैयार की गई थीं। पहली परियोजना गोपालनगर टाड़ी के अपस्ट्रीम में सरयू नदी के दाएं तट पर बाढ़ सुरक्षार्थ कार्य हेतु थी, जिसकी लागत 1187.52 लाख रुपये प्रस्तावित थी। दूसरी परियोजना गोपालनगर टाड़ी एवं शिवाल मठिया में बाढ़ राहत कार्य के लिए 1172.32 लाख रुपये की बनाई गई थी। तीसरी परियोजना शिवाल के डाउनस्ट्रीम में बाढ़ सुरक्षार्थ कार्य हेतु लगभग 499.04 लाख रुपये की थी।
चौंकाने वाली बात यह है कि इन तीनों परियोजनाओं को विभाग ने यह कहकर निरस्त कर दिया कि आगामी बाढ़ में नदी के व्यवहार और स्थल की स्थिति का अध्ययन कर अगले वर्ष मुख्य अभियंता समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। परियोजनाएं निरस्त होने की खबर फैलते ही क्षेत्र में रोष और निराशा का माहौल बन गया।

ग्राम प्रधान परमात्मा गोंड ने बताया कि शिवाल से गोपालनगर टाड़ी की सीमा तक लगभग तीन किलोमीटर लंबा पक्का ठोकर बनना अत्यंत आवश्यक है। पिछले वर्ष भी ठोकर निर्माण का आश्वासन दिया गया था, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। शिवाल मठिया और गोपालनगर टाड़ी की लगभग 30 हजार की आबादी सीधे कटान की जद में है। यदि शीघ्र पक्का ठोकर नहीं बनाया गया तो दोनों गांवों का अस्तित्व समाप्त हो सकता है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि पिछले वर्ष किए गए बाढ़ राहत कार्यों का आधे से अधिक हिस्सा नदी में समा चुका है, जिससे विभागीय कार्यों की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। नदी के मुहाने पर बसे शिवजी चौधरी, गौरी चौधरी, रामजी चौधरी और चंद्रमा चौधरी सहित दर्जनों परिवारों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि समय रहते कटान रोधी कार्य कराकर उनके घरों और खेतों को बचाया जाए।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि बाढ़ विभाग की लापरवाही के चलते पूर्व में लगभग 24 घर गंगा में विलीन हो चुके हैं, लेकिन आज तक कटान पीड़ित परिवारों को न तो पुनर्वास की भूमि मिली और न ही कोई स्थायी व्यवस्था की गई।
ग्राम प्रधान परमात्मा गोंड ने शासन-प्रशासन को चेताते हुए कहा कि यदि शीघ्र ही शिवाल मठिया से गोपालनगर टाड़ी तक पक्का ठोकर बनाकर कटान से बचाव नहीं किया गया, तो क्षेत्र की लगभग 30 हजार आबादी को सड़क पर उतरकर आंदोलन करने को मजबूर होना पड़ेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और बाढ़ विभाग की होगी।
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