- डाॅ० गणेश पाठक (पर्यावरणविद्)
वर्तमान समय में सुरहा ताल अपने अस्तित्व से जूझ रहा है । कारण कि सुरहा ताल में पोषित जैव विविधता पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं । सुरहा ताल में रहने वाले जीव - जंतुओं एवं प्रवासी पक्षियों के प्राकृतिक आवास समाप्त होते जा रहे हैं। सुरहा ताल परिक्षेत्र में पारिस्थितिकी असंतुलन बढ़ता जा रहा है। जीव - जंतुओं की प्रजातियां धीरे - धीरे समाप्त होती जा रही है, जो स्पष्टत: दिखाई दे रहा है। सुरहा ताल की जैव विविधता पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। इसका मुख्य कारण सुरहा ताल परिक्षेत्र में मानव की बढ़ती गतिविधियां - जैसे - सुरहा ताल का क्षेत्रफल कम होना, पक्षियों सहित अन्य जीव- जंतुओं का अवैध शिकार होना , बर्षा में कमी के कारण सुरहा ताल में जल की कमी होना, जलवायु परिवर्तन के कारण अभी अति वृष्टि से जल प्लावन की स्थिति उत्पन्न होना, तो कभी अनावृष्टि अर्थात् कम बर्षा के कारण सूखा की स्थिति उत्पन्न होना, जलवायु परिवर्तन के कारण भी कभी गर्मी अधिक होना, तो कभी अधिक ठंडक का प्रभाव होना आदि ऐसे कारण हैं, जिनके चलते सुरहा ताल का पारिस्थितिकी तंत्र असंतुलित होता जा रहा है और इस प्राकृतिक ताल की जैव विविधता पर संकट बढ़ता जा रहा है। यद्यपि कि सुलह ताल के चतुर्दिक एक किलोमीटर के परिक्षेत्र को पारिस्थितिकी दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र घोषित कर दिया गया है ,फिर भी इस पर विशेष ध्यान नहीं दिया जा रहा है एवं इस क्षेत्र का पारिस्थितिकी तंत्र असंतुलित होता जा रहा है। इस विषय पर वैज्ञानिकों द्वारा गहन शोध की आवश्यकता है ताकि शोध से प्राप्त निष्कर्षों के आधार पर योजनाएं लागू कर सुरहा ताल की जैव विविधता को बचाकर न केवल सुरहा ताल को सुरक्षित किया जा सकता है, बल्कि इसके सम्पूर्ण परिक्षेत्र में उत्पन्न हो रहे पर्यावरण एवं पारिस्थितिकी संकट से बचा जा सकता है।